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कला का अर्थ

कला का अर्थ - कला   शब्द इतना व्यापक है कि विभिन्न विद्वानों की परिभाषाएँ केवल एक विशेष पक्ष को छूकर रह जाती हैं। कला का अर्थ अभी तक निश्चित नहीं हो पाया है, यद्यपि इसकी हजारों परिभाषाएँ की गयी हैं। भारतीय परम्परा के अनुसार कला उन सारी क्रियाओं को कहते हैं जिनमें कौशल अपेक्षित हो। यूरोपीय शास्त्रियों ने भी कला में कौशल को महत्त्वपूर्ण माना है।     मैथिलशरण गुप्त के  शब्दों में, अभिव्यक्ति की कुशल शक्ति ही तो कला है  -- साकेत , पंचम सर्ग दूसरे शब्दों में -  मन के अंतःकरण की सुन्दर प्रस्तुति ही कला है। कला का इतिहास कला शब्द का प्रयोग शायद सबसे पहले  भरत  के " नाट्यशास्त्र " में ही मिलता है। पीछे  वात्स्यायन  और  उशनस्  ने क्रमश: अपने ग्रंथ " कामसूत्र " और " शुक्रनीति " में इसका वर्णन किया। " कामसूत्र ", " शुक्रनीति ", जैन ग्रंथ "प्रबंधकोश", "कलाविलास", " ललितविस्तर " इत्यादि सभी भारतीय ग्रंथों में कला का वर्णन प्राप्त होता है। अधिकतर ग्रंथों में कलाओं की संख्या 64 मानी गयी है। "प्रबंधकोश...